डीएलएफ: ऋण बोझ घटाने की कवायद

रियल्टी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डीएलएफ अपने कर्ज भार को कम किए जाने की कोशिश के तहत गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों की बिक्री की अपनी योजना पर अमल करते हुए इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ी है। रियल्टी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी पुणे स्थित एसईजेड में अपनी 67 फीसदी हिस्सेदारी से बाहर हो गई है जिसके लिए उसे इस बिक्री से लगभग 540 करोड़ रुपये मिलेंगे।

सितंबर 2011 में कंपनी का कुल कर्ज भार 222,500 करोड़ रुपये पर था। कंपनी ने अगले तीन वर्षों के दौरान गैर प्रमुख परिसंपत्तियों की बिक्री से लगभग 6,000-7,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। पुणे एसईजेड के अलावा डीएलएफ अपने नोएडा आईटी पार्क से भी बाहर हुई है और उसने गुडग़ांव में में भी जमीन बेची है। इन तीन बिक्री से उसे लगभग 1290 करोड़ रुपये हासिल होने हैं। विश्लेषकों का कहना है कि शेयर के लिए बड़ा बदलाव अमान रिजॉट्र्स की बिक्री से दिखेगा जिससे उसे लगभग 2000 करोड़ रुपये की रकम मिलेगी।

कंपनी को इससे न सिर्फ वित्त वर्ष 2012 के अपने 3000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने और कर्ज भार को घटा कर 19,000 करोड़ रुपये के स्तर पर लाने में मदद मिलेगी बल्कि इससे उसे अपनी कुल गैर-प्रमुख परिसंपत्ति बिक्री के लगभग 50 फीसदी लक्ष्य को भी हासिल करने में आसानी होगी। इससे उसकी ब्याज लागत में भी कमी आएगी जो चालू वित्त वर्ष के लिए लगभग 2500 करोड़ रुपये के दायरे में रहने की संभावना है।

जहां परिसंपत्ति बिक्री से कंपनी को नकदी प्रवाह में सुधार लाने में मदद मिलेगी वहीं नई परियोजनाओं के लॉन्च से होने वाली बिक्री अहम होगी। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि मंदी एवं विलंब की वजह से भूखंड बिक्री एवं आवासीय परियोजनाओं के कार्यान्वयन में विलंब हो सकता है।

हालांकि डीएलएफ की कुछ डेट योजनाओं पर क्रिसिल द्वारा हाल ही में रेटिंग में कमी नकारात्मक पहल है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर परिसंपत्ति बिक्री की रफ्तार में सुधार और ब्याज दर चक्र में बदलाव होता है तो हालात में सुधार आ सकता है। कंपनी को कम ब्याज दर से न सिर्फ अपने भारी-भरकम कर्ज की अदायगी में मदद नहीं मिलेगी बल्कि इससे ग्राहकों द्वारा आवासों की खरीदारी भी सस्ती हो जाएगी।

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