इन्फ्रा बॉण्ड से 50 हजार तक पर बचा सकेंगे टैक्स?

नई दिल्ली।। इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉण्ड में 50,000 रुपए तक का इनवेस्टमेंट टैक्स-फ्री हो सकता है, जो अभी 20,000 रुपए है। मार्च में पेश होने जा रहे बजट में यह तोहफा मिल सकता है। इससे रीटेल इनवेस्टर्स को तो फायदा होगा ही, सरकार का भी भला होगा। सरकारी अधिकारियों ने ईटी को बताया कि वित्त मंत्रालय के इकनॉमिक अफेयर्स डिपार्टमेंट ने 2012-13 के बजट प्रपोजल में इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉण्ड में टैक्स छूट लिमिट बढ़ाने का सुझाव दिया है। इस पर आखिरी फैसला रेवेन्यू डिपार्टमेंट करेगा।

मंत्रालय के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘ सोच यह भी है कि क्या इसे और बढ़ाया जा सकता है। टैक्स फ्री बॉण्ड सिर्फ इनवेस्टर के लिए ही अच्छे नहीं हैं, इनसे फंड जुटाने में भी मदद मिलती है। ‘ देश की इकॉनमी के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर काफी अहमियत रखता है। अगर रीटेल इनवेस्टर टैक्स छूट के लिए इस बॉन्ड में ज्यादा पैसा लगाते हैं तो सरकार को इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट की फंडिंग में आसानी होगी। रोजगार बढ़ेगा और इकॉनमी की सेहत भी सुधरेगी।
पांच साल के ब्रेक के बाद 2010-11 बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉण्ड पर टैक्स छूट दी गई। इसमें 20,000 रुपए तक के इनवेस्टमेंट को टैक्स-फ्री किया गया। इस लिमिट तक इनवेस्टमेंट करने पर 6,180 रुपए तक का टैक्स बचता है। पहले इसे एक साल के लिए लाया गया था। हालांकि, पिछले साल इसे और एक साल के लिए बढ़ाया गया। अब इकनॉमिक अफेयर्स डिपार्टमेंट टैक्स रिबेट को फाइनैंशल ईयर 2013 में भी जारी रखना चाहता है।
एक्सपर्ट भी इस प्रपोजल को सही मानते हैं। आईडीएफसी में एग्जेक्युटिव डायरेक्टर विक्रम लिमये ने कहा, ‘ यह अच्छा प्रपोजल है। ज्यादा टैक्स बेनेफिट से बॉन्ड इश्यू करने वालों को अधिक फंड जुटाने में मदद मिलेगी।’ वहीं, फीडबैक वेंचर्स के चेयरमैन विनायक चटर्जी ने कहा, ‘इसका मकसद हाउसहोल्ड और जनरल सेविंग्स का इस्तेमाल इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट के लिए करना है। अब तक इसमें बहुत सफलता नहीं मिली है। अगर टैक्स ब्रेक से इसमें मदद मिलती है तो ऐसा किया जाना चाहिए।’
2010-11 में आईडीएफसी, आरईसी, आईआईएफसीएल सहित कुछ कंपनियों ने 3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा रकम इस रास्ते से जुटाई है। पिछले फाइनैंशल ईयर में सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को भी 30,000 करोड़ के टैक्स-फ्री बॉन्ड इश्यू करने की इजाजत दी थी। बैंक भी इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉण्ड इश्यू करना चाहते हैं। वे इसके लिए वित्त मंत्रालय से लॉबीइंग कर रहे हैं। बैंकों की दलील है कि इससे उन्हें इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए लॉन्ग टर्म फंड जुटाने में सहूलियत होगी। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी भी इशारा कर चुके हैं कि सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में इनवेस्टमेंट को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार कर रही है। अगले पांच साल में इस सेक्टर को 1 लाख करोड़ डॉलर की जरूरत होगी। इसका 50% प्राइवेट सेक्टर से आने की उम्मीद है।

साभार : NBT

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